अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जिले में एचआईवी संक्रमण के मामलों में इस वर्ष अचानक बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बीते वर्ष के मुकाबले इस साल अब तक तीन गुना से अधिक मरीज सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जहां जिले में केवल सात एचआईवी पॉजीटिव मरीज मिले थे, वहीं 2025 में अब तक 26 लोगों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। इनमें से 20 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं।
आंकड़ों ने खड़ा किया बड़ा सवाल
उत्तराखंड का यह पहाड़ी जिला अब तक एचआईवी संक्रमण के संदर्भ में कम जोखिम वाले क्षेत्रों में गिना जाता था। परंतु ताजा आंकड़े बताते हैं कि अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में तीन गुना अधिक होना भी एक चिंताजनक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लैंगिक अनुपात संक्रमण के प्रसार के सामाजिक और व्यवहारिक कारणों की ओर संकेत करता है।
जागरूकता की कमी और प्रवास प्रमुख कारण
अल्मोड़ा में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई सामाजिक कारण हैं। जिले के बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों से युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों का कामकाजी प्रवास काफी अधिक है। इन लोगों का बाहरी राज्यों या शहरी इलाकों में लंबे समय तक रहना और असुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना संक्रमण का प्रमुख माध्यम बनता है। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और एचआईवी परीक्षण की सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण भी लोग समय पर जांच नहीं करा पाते।स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, अब जिले में 26 में से अधिकांश मरीज ऐसे हैं जो काम या मजदूरी के सिलसिले में कुछ समय के लिए बाहर रहे और लौटने के बाद एचआईवी पॉजीटिव पाए गए।
महिलाओं पर अप्रत्यक्ष असर
महिलाओं में भी एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में संक्रमण उनके जीवनसाथी के जरिए ही हुआ है। ग्रामीण इलाकों में अभी भी जागरूकता की कमी और सामाजिक शर्म के कारण महिलाएं एचआईवी जांच से बचती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पुरुषों में संक्रमण की श्रृंखला नहीं रोकी गई तो आने वाले वर्षों में महिलाओं और नवजातों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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स्वास्थ्य विभाग की तैयारी और योजनाएँ
एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अल्मोड़ा जिले के स्वास्थ्य विभाग ने अब जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। जिला अस्पताल के एआरटी (एंटीरिट्रोवायरल थेरेपी) केंद्र में मरीजों को नि:शुल्क परामर्श और दवा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही गांवों और स्कूलों में विशेष शिविर लगाकर लोगों को सुरक्षित यौन संबंध, जांच की आवश्यकता, और समय पर उपचार के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) के दिशा-निर्देशों के तहत कंडोम वितरण, प्रीवेंटिव टेस्टिंग और काउंसलिंग सत्र भी चलाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी अब केवल “शहरों की बीमारी” नहीं रह गई है। छोटे और पर्वतीय जनपदों में भी इसका प्रसार बढ़ रहा है क्योंकि लोग जानकारी के अभाव में जोखिम भरे व्यवहार को अपनाते हैं। यदि समय रहते जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
समाज की जिम्मेदारी
एचआईवी संक्रमण से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती आज भी सामाजिक कलंक है। संक्रमित व्यक्ति को समाज में स्वीकार्यता न मिलना उसे उपचार से दूर कर देता है। अल्मोड़ा जैसे सामाजिक रूप से घनिष्ठ समुदायों में यह कलंक और गहरा असर डालता है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि अब सिर्फ स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा।समाप्ति में कहा जा सकता है कि अल्मोड़ा में एचआईवी मामलों की बढ़ोतरी चेतावनी है कि स्वास्थ्य जागरूकता, जांच और व्यवहार परिवर्तन की दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वरना यह शांत पहाड़ी जिला भी संक्रमण की बढ़ती चपेट में आने से नहीं बच पाएगा।
