देहरादून: दून में वाहनों के वीआईपी नंबरों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार परिवहन विभाग के लिए आयोजित नीलामी में इस रुझान ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की ओर से 29 वीआईपी नंबरों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें लोगों की भारी दिलचस्पी देखने को मिली। खास बात यह रही कि इस बार 0001 जैसा पारंपरिक लोकप्रिय नंबर नहीं, बल्कि 0007 नंबर ने सबका ध्यान खींच लिया। जेम्स बॉन्ड से जुड़ी इस खास संख्या के प्रति लोगों का क्रेज इतना ज्यादा रहा कि इसकी बोली सात लाख रुपये पर जाकर बंद हुई।
आम तौर पर हर नीलामी में 0001 नंबर सबसे अधिक बोली में जाता है, लेकिन इस बार 0007 नंबर ने सबको पीछे छोड़ दिया। यह नंबर शानदार बोली के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि 0005 नंबर दूसरे और 0001 नंबर तीसरे स्थान पर रहा। इस परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब वाहन मालिक पारंपरिक अंकों से हटकर नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। कई वाहन मालिकों का मानना है कि एक खास नंबर न सिर्फ उनकी गाड़ी की पहचान बढ़ाता है, बल्कि यह उनके ‘स्टेटस सिंबल’ का भी अहम हिस्सा बन गया है।
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नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन माध्यम से कराई गई। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, अब बोली लगने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार तक अपनी लंबित राशि जमा करनी होगी। यदि वह निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं करते हैं, तो उनकी बोली रद्द मानी जाएगी और नंबर दूसरे इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रदान किए जाएंगे। परिवहन विभाग का कहना है कि इस नीलामी से सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सिर्फ पिछले कुछ वर्षों में वीआईपी नंबरों की बिक्री से दून आरटीओ को लाखों रुपये की आमदनी हो चुकी है। विभाग का मानना है कि आधुनिक दौर में स्टाइलिश और यूनिक नंबरों की मांग लगातार बढ़ेगी, जिससे भविष्य में और भी बड़े लाभ मिलने की संभावना है।
जानकारों का कहना है कि 29 नंबरों की नीलामी से जो प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, वह राज्य में ऑटोमोबाइल संस्कृति के बढ़ते रुझान को दर्शाती है। अब वाहन मालिक केवल गाड़ी ही नहीं, बल्कि उसके नंबर से भी अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि 0007 जैसे नंबर अब सिर्फ फिल्मों का हिस्सा नहीं, बल्कि सड़कों पर भी दिखने लगे हैं। दून में इस नीलामी ने यह तो साबित कर दिया कि भले ही कीमत लाखों तक पहुंच जाए, मगर वीआईपी नंबरों की पहचान पाने की चाहत लोगों में कम नहीं हुई है। परिवहन विभाग के लिए यह नीलामी न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभदायक रही, बल्कि राज्यभर में इसके प्रति जागरूकता और प्रतिस्पर्धा भी अधिक बढ़ी है।
