उत्तरकाशी: उत्तराखंड का उत्तरकाशी ज़िला इन दिनों एक दिल दहला देने वाले मामले को लेकर सुर्खियों में है। ग्राम कमद निवासी 24 वर्षीय पूजा नेगी की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। लेकिन इस जघन्य अपराध से भी ज़्यादा सवाल पुलिस के रवैये पर उठ रहे हैं। अपराध को अंजाम देने वालों तक पहुंचने से पहले ही पुलिस की कार्यशैली ने पूरे राज्य को गुस्से और आक्रोश से भर दिया है। दरअस्ल, परिजनों को शव सौंपने के बजाय पुलिस ने खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे मामले ने और भी तूल पकड़ लिया है।
अपराध जिसने हिला दिया उत्तराखंड
पूजा नेगी उत्तरकाशी जिले के कमद गांव से ताल्लुक रखती थीं। बताया जा रहा है कि वह अपने घर से कुछ दूरी पर अचानक लापता हो गईं। परिजनों और ग्रामीणों द्वारा खोजबीन किए जाने के बाद उसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसके साथ पहले बलात्कार किया गया और फिर हत्या की गई। जिस तरह हत्या को अंजाम दिया गया, उसने इस शांत और धार्मिक पहचान वाले पहाड़ी जिले को हिला कर रख दिया।
परिजनों को नहीं सौंपा शव
आम तौर पर ऐसी घटनाओं में पीड़िता के परिजनों को शव सौंपा जाता है ताकि वह पारंपरिक रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार कर सकें। लेकिन इस बार पुलिस ने खुद ही शव का अंतिम संस्कार कर डाला। यही बात पूरे मामले को और दर्दनाक बना रही है। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सबूत मिटाने और मामले को दबाने के लिए ऐसा कदम उठाया।
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आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा
पूजा नेगी की हत्या और फिर पुलिस द्वारा शव का अंतिम संस्कार करने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। इसके बाद सैकड़ों ग्रामीण कमद गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और दोषियों को तुरंत पकड़ने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते जांच की होती तो अपराध रोका जा सकता था।
न्याय की मांग तेज
ग्रामीणों और परिजनों की आवाज़ अब पूरे राज्य में गूंज रही है। लोग सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस जघन्य अपराध को मुद्दा बना रहे हैं। उत्तराखंड सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह इस मामले में जांच के आदेश दे और ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
विपक्ष का हमला
राज्य की विपक्षी पार्टियों ने भी इस मामले पर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। यदि पुलिस पर जवाबदेही तय नहीं की गई तो आने वाले समय में और भी बड़ी घटनाएं सामने आ सकती हैं।
दिल्ली और देहरादून तक गूंज
उत्तरकाशी के इस मामले ने अब राज्य की सीमाओं को पार कर दिल्ली और देहरादून तक गूंज मचाना शुरू कर दिया है। महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई गैर-सरकारी संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनहीनता और सिस्टम की विफलता का उदाहरण है।
जांच और कार्रवाई की मांग
लगातार बढ़ रहे दबाव को देखते हुए अधिकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस के अलावा न्यायिक जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलेगी और पुलिस की भूमिका की पारदर्शी जांच नहीं होगी, वे चुप नहीं बैठेंगे।
क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ कागजों पर?
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर उस सवाल को जीवित कर देती है, जिसे लेकर वर्षों से बहस होती रही है—क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ सरकारी दस्तावेज़ों और चुनावी घोषणाओं तक ही सीमित रह गई है? जब पुलिस जिसका काम पीड़िता और परिवार को न्याय दिलाना है, वही सवालों के घेरे में आ जाए, तो जनता किससे उम्मीद करे?
