अल्मोड़ा: उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक मां नन्दा देवी मेला एक बार फिर अल्मोड़ा में पूरे धूमधाम के साथ शुरू हो गया है। जैसे ही ढोल-दमाऊं की गूंज और लोकगीतों की स्वर लहरियाँ शहर की गलियों में गूंजने लगीं, वैसे ही पूरा वातावरण श्रद्धा और उल्लास से भर उठा। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शिरकत करेंगे। सीएम धामी मां नन्दा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना करेंगे। साथ ही वे इस अवसर पर अल्मोड़ा की जनता के साथ मेले में शामिल होकर पारंपरिक आयोजनों को प्रोत्साहन देंगे।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार में सवार होकर माल रोड स्थित पुनर्निर्मित मुंशी हरिप्रसाद टम्टा धर्मशाला एवं क्राफ्ट म्यूजियम का लोकार्पण करेंगे. इस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री होटल शिखर तिराहा से पैदल मार्ग से प्रस्थान कर अपराह्न में नंदा देवी मंदिर परिसर पहुंचकर मां नंदा देवी मेले का उद्घाटन कर मंदिर परिसर में लोगों को संबोधित करेंगे।
श्रद्धा और परंपरा की अनोखी झलक
मां नन्दा देवी की शोभायात्रा, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोकनृत्यों और भक्तिमय गीतों के बीच विधि-विधान से संपन्न हुई। स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु भी इस दिव्य आयोजन के साक्षी बने। रंग-बिरंगे परिधान, फूलों से सजी झांकियाँ और माँ के जयकारों से अल्मोड़ा की गलियाँ जीवंत हो उठीं।
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सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
नन्दा मेला केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि कुमाऊं की संस्कृति, लोककला और लोकसंगीत का अनूठा संगम भी है। मेले में पारंपरिक हस्तशिल्प, लोकनृत्य प्रस्तुतियाँ और स्थानीय व्यंजनों की भरमार रहती है, जो इसे और भी खास बना देती हैं।
श्रद्धालुओं में उल्लास
मां नन्दा देवी को ‘कुमाऊं की आराध्य देवी’ माना जाता है। भक्तगण उनके आशीर्वाद के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। माना जाता है कि जो भी श्रद्धा से मां की शरण में आता है, उसका जीवन सुख और समृद्धि से भर जाता है।
प्रशासन की ओर से तैयारियाँ
मेले में सुरक्षा व व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। साथ ही सांस्कृतिक मंच पर प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रम दर्शनार्थियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होंगे।
मूर्ति निर्माण है खास
मां नंदा सुनंदा की मूर्तियां का निर्माण इस मेले का खास आकर्षण होता है. इस बारमां नंदा सुनंदा की मूर्तियां बनाने के लिए कदली यानी केले के वृक्ष रैलाकोट दुला गांव से लाए जाएंगा. मंदिर कमेटी के साथ स्थानीय लोग 29 अगस्त को कदली वृक्षों को निमंत्रण देने जाएंगे।
नन्दा देवी महोत्सव का महत्व
करीब 1000 साल पुरानी परंपरा से जुड़े इस महोत्सव का आयोजन हर वर्ष भाद्रपद मास में किया जाता है। यह मेले न केवल धार्मिक महत्व लिए होते हैं बल्कि यहां की लोक कलाओं, लोकनृत्यों और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलता है। उत्तराखंड में नन्दा देवी को “राज्य की आराध्य देवी” के रूप में पूजा जाता है, और अल्मोड़ा का यह महोत्सव मां के प्रति श्रद्धा और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक है।
लोक आस्था और सांस्कृतिक रंगमंच
मेला परिसर में कलाकारों द्वारा नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। व्यापारियों के लिए भी यह मेला बड़ी आर्थिक संभावनाएं लेकर आता है क्योंकि दूर-दराज़ से आए लोग स्थानीय उत्पादों और स्मृति चिन्हों की खरीदारी करते हैं।