International Tiger Day: आज जब पूरी दुनिया “अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day)” मना रही है, भारत ने बाघों के संरक्षण में दुनिया को एक बार फिर चौंका दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि अब देश में 3,682 बाघ हैं—जो सिर्फ एक प्रजाति की रक्षा नहीं, बल्कि हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का पैमाना है।
बाघ दिवस 2025: इतिहास
हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुई थी, जब 13 बाघ रेंज देशों ने मिलकर संकल्प लिया कि बाघों की संख्या दोगुनी की जाएगी।
इस वर्ष की थीम: “Securing the future of Tigers with Indigenous Peoples and Local Communities at the heart”
भारत: बाघों का घर, दुनिया का लीडर
बिंदु | विवरण |
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वर्तमान बाघ संख्या | 3,682 |
टाइगर रिज़र्व की संख्या | 58 संरक्षित क्षेत्र |
कुल क्षेत्रफल | 82,800+ वर्ग किमी |
वैश्विक हिस्सेदारी | दुनिया के 75% जंगली बाघ भारत में |
शीर्ष बाघ वाले राज्य | 1. मध्य प्रदेश – 785 बाघ 2. कर्नाटक – 563 बाघ 3. उत्तराखंड – 560 बाघ |
प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल
1973 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज 50 वर्षों में 58 रिज़र्व और हज़ारों बाघों की सफलता कहानी बन गया है।
मंत्री भूपेंद्र यादव का संदेश:
“बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने तक सीमित नहीं है। यह हमारे जंगलों और पर्यावरण की संपूर्ण सेहत का संकेत है।”
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश:
“भारत ने न सिर्फ बाघों को बचाया, बल्कि उनके लिए संपन्न इकोसिस्टम भी तैयार किया है।”
बाघों की बढ़ती संख्या
- 2006: 1,411 बाघ
- 2022: 3,682 बाघ
- 2024: वैश्विक बाघ संख्या 5,574+
यह सफलता संभव हुई है सख्त कानूनों, बेहतर निगरानी, सरकारी योजनाओं और आम जनता के सहयोग से।
क्यों जरूरी है बाघों का बचाव?
- जंगलों की सेहत: टॉप प्रिडेटर होने के नाते बाघों की उपस्थिति पूरे इकोसिस्टम की सेहत को दर्शाती है।
- बायोडायवर्सिटी: संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका।
- आर्थिक लाभ: इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार के साधन।
- संस्कृति: कई आदिवासी समुदायों में बाघ को भाई/रक्षक माना जाता है।
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बड़े खतरे और भारत की रणनीति
- शिकार और तस्करी: सख्त निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से कमी आई है।
- मानव-बाघ संघर्ष: पुनर्वास और मुआवज़े की योजनाएं शुरू हुईं।
- वनों का सिमटना: वनों को जोड़ने के लिए कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
भारत की बाघ सफलता गाथा
- 1973: 9 रिज़र्व से शुरूआत, अब 58+
- मजबूत कानून: तकनीक और निगरानी के साथ सख्त कार्रवाई
- जनभागीदारी: ग्रामीण समुदायों का सहयोग
- अंतरराष्ट्रीय पहचान: कई टाइगर रिज़र्व ने वैश्विक मानकों को प्राप्त किया
अब आगे क्या?
- जागरूकता: स्कूल, कॉलेज और सोशल मीडिया के ज़रिए
- जिम्मेदार पर्यटन: प्लास्टिक मुक्त, शांतिपूर्ण जंगल यात्रा
- स्थानीय सहयोग: संघर्षरत गांवों के साथ साझेदारी
- नीतिगत पहल: वाइल्डलाइफ़ सुरक्षित कॉरिडोर की अनिवार्यता
निष्कर्ष: #SaveTigersSaveNature
आज जब भारत में बाघों की दहाड़ और तेज हो चुकी है, यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि एक ज़िम्मेदारी है। हमें यह संरक्षण यात्रा जारी रखनी होगी – क्योंकि बाघों को बचाना मतलब भारत के भविष्य को बचाना है।
तो आइए, इस अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर संकल्प लें:
“बाघ बचाओ, जंगल बचाओ, भारत बचाओ!”