Missile Man का आखिरी सफर: जब पूरा देश डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जाने पर रो पड़ा!
27 जुलाई इतिहास के पन्नों में सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक दिन है जिस दिन भारत ने अपने सबसे प्यारे राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को खोया,आज भारत के सबसे चहेते राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 10वीं पुण्यतिथि है।आज पूरा देश ‘मिसाइल मैन’ और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि दे रहा है।
उनकी पुण्यतिथि पर आइए, उनके महान योगदान और परियोजनाओं के साथ उनकी जीवन गाथा को जानते हैं:
बचपन और शुरुआती दिन
डॉ. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मछुआरे के घर हुआ था. बचपन में वे अखबार भी बेचते थे ताकि घर चला सकें। छोटी उम्र से ही उनमें पढ़ाई के प्रति लगन और बड़े सपने देखने की आदत थी। सेंट जोसेफ कॉलेज से साइंस में ग्रेजुएशन के बाद मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की
वैज्ञानिक जीवन की शुरुआत और मुख्य परियोजनाए (1958-1969)
1958 में डॉ. कलाम DRDO के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में वैज्ञानिक बने. शुरुआत में उन्होंने छोटे हेलीकॉप्टर के डिजाइन पर काम किया और 1965 में एक विस्तार योग्य रॉकेट परियोजना पर स्वतंत्र रूप से काम शुरू किया
हालांकि वह एयरफोर्स के फाइटर पायलट बनने से चूक गए (9वें स्थान पर रहे जबकि सिर्फ 8 सीटें थीं), लेकिन किस्मत उन्हें और बड़ा रोल देने वाली थी।
वैज्ञानिक जीवन: DRDO से ISRO तक का सफर
- DRDO में शुरुआत (1958-1982)
1958 में डॉ. कलाम DRDO के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में वैज्ञानिक के रूप में जुड़े। शुरुआत में उन्होंने छोटे हेलीकॉप्टर डिजाइन पर काम किया। - ISRO में क्रांतिकारी कार्य (1969-1982)
1969 में वे ISRO में शामिल हुए और यहाँ उन्होंने भारत की अंतरिक्ष तकनीक में क्रांति ला दी - SLV-III परियोजना का नेतृत्व
डॉ. कलाम ने भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल SLV-III का प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनकर इसे सफल बनाया। जुलाई 1980 में इसने रोहिणी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुँचाया – यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।
मिसाइल मैन’ बनने की कहानी
1982 में डॉ. कलाम DRDO में वापस आए और इंटिग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) के मुख्य वैज्ञानिक बने। 26 जुलाई 1983 को शुरू हुए इस कार्यक्रम से भारत ने पांच प्रकार की मिसाइलें विकसित कीं:
- अग्नि मिसाइल: मध्यम से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल
- अग्नि-1: 700-1200 किमी रेंज
- अग्नि-2: 2000-3000 किमी रेंज
- अग्नि-3: 3000-5000 किमी रेंज
- पृथ्वी मिसाइल: छोटी दूरी की सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल
- पृथ्वी-I: 150 किमी (सेना के लिए)
- पृथ्वी-II: 250-350 किमी (वायुसेना के लिए)
- पृथ्वी-III (धनुष): 350 किमी (नौसेना के लिए)
- त्रिशूल: कम दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल
- आकाश: मध्यम दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल
- नाग: एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
पोखरण-2: जब भारत बना न्यूक्लियर पावर
11 और 13 मई 1998 को हुए पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों में डॉ. कलाम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और DRDO सचिव के रूप में उन्होंने पूरे ऑपरेशन की योजना और सफल क्रियान्वयन का जिम्मा संभाला। इससे भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया और डॉ. कलाम राष्ट्रीय हीरो बन गए।
जनता के राष्ट्रपति: राष्ट्रपति भवन में वैज्ञानिक
2002 में डॉ. कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए – वे पहले वैज्ञानिक राष्ट्रपति थे और पहले अविवाहित राष्ट्रपति भी। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आम लोगों, खासकर युवाओं के लिए खोल दिया। लोग उन्हें प्यार से “People’s President” कहते थे।
राष्ट्रपति काल की उपलब्धियाँ (2002-2007)
- बच्चों और युवाओं के साथ निरंतर संवाद
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार की पहल
- राष्ट्रपति भवन को जनता के लिए सुलभ बनाना
- देश भर में युवाओं को प्रेरित करने के लिए व्याख्यान
चिकित्सा क्षेत्र में योगदान
- कलाम-राजू स्टेंट (1998)
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूपथिराजू सोमा राजू के साथ मिलकर कम लागत का कोरोनरी स्टेंट बनाया, जिससे गरीब मरीजों को फायदा हुआ। - कलाम-राजू टैबलेट (2012)
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मजबूत टैबलेट कंप्यूटर डिजाइन किया।
टेक्नोलॉजी विजन 2020: भारत को विकसित देश बनाने का खाका
1998 में डॉ. कलाम ने “टेक्नोलॉजी विजन 2020” तैयार किया – भारत को 2020 तक विकसित देश बनाने का रोडमैप। इसमें पांच मुख्य क्षेत्र थे:
- 🌾 कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
- 📚 शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा
- 💻 सूचना और संचार तकनीक
- 🏗️ बुनियादी ढांचा विकास (PURA – गांवों में शहरी सुविधाएं)
- ⚙️ महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता
यह दस्तावेज़ 500 विशेषज्ञों के साथ तीन साल की मेहनत का नतीजा था।
प्रेरणादायक लेखन: किताबों से दिल जीतना
डॉ. कलाम की प्रसिद्ध पुस्तकें आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं:
- “Wings of Fire” – उनकी आत्मकथा
- “India 2020” – विकसित भारत का खाका
- “Ignited Minds” – युवाओं के लिए प्रेरणा
- “Target 3 Billion” – ग्रामीण विकास पर
सम्मान और पुरस्कार
डॉ. कलाम को मिले मुख्य सम्मान:
- 1981: पद्म भूषण
- 1990: पद्म विभूषण
- 1997: भारत रत्न
- 2007: किंग चार्ल्स-II मेडल (रॉयल सोसाइटी, यूके)
- 48 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि
आखिरी सफर: जब पूरा देश रो पड़ा
27 जुलाई 2015: वह दुखद शाम
शाम 6:30 बजे, IIM शिलॉन्ग में “Creating a Liveable Planet Earth” पर व्याख्यान देते समय डॉ. कलाम अचानक मंच पर ही गिर पड़े। उन्हें तुरंत बेथानी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हो गई। वे 83 साल के थे।
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राष्ट्रीय शोक और अंतिम विदाई
- भारत सरकार ने 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया
- उनका पार्थिव शरीर रामेश्वरम ले जाया गया
- 3.5 लाख से अधिक लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के सभी बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी
अमर विरासत: जो आज भी जिंदा है
स्थायी स्मारक
- 2015 में हैदराबाद का DRDO मिसाइल कॉम्प्लेक्स का नाम “Dr. APJ Abdul Kalam Missile Complex” रखा गया
- 15 अक्टूबर को वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे मनाया जाता है
- कलाम फाउंडेशन उनके विजन 2020 को आगे बढ़ा रहा है
प्रेरणादायक विचार जो आज भी गूंजते हैं
डॉ. कलाम के अनमोल विचार आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देते हैं:
“सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने तो वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
“छोटा लक्ष्य तो अपराध है, हमेशा अपने लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें।”
“अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले सूरज की तरह जलना होगा।”
“असफलता मुझे तब तक हरा नहीं सकती जब तक मेरी सफल होने की इच्छा पर्याप्त मजबूत है।”
आज भी प्रासंगिक: कलाम का संदेश
आज जब पूरा देश उन्हें याद कर रहा है, तो प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में – “उनके विचार आज भी भारत के युवाओं को एक विकसित और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।”
डॉ. कलाम ने साबित किया कि गरीबी, संघर्ष और मुश्किलें किसी इंसान को महान बनने से नहीं रोक सकतीं। रामेश्वरम के एक मछुआरे के बेटे से भारत के राष्ट्रपति तक का यह सफर हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
निष्कर्ष: एक असली हीरो की कहानी
27 जुलाई 2015 को भारत ने केवल एक वैज्ञानिक या राष्ट्रपति को नहीं खोया – बल्कि एक ऐसा इंसान खो दिया जो करोड़ों दिलों में आज भी जिंदा है। डॉ. कलाम की मृत्यु एक युग के अंत जैसी थी, लेकिन उनके विचार, उनके सपने और उनकी प्रेरणा आज भी हमारे साथ है।
“Dream, dream, dream. Dreams transform into thoughts and thoughts result in action” – यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 10 साल पहले था।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को नमन! 🙏
जय हिंद, जय भारत!
यह लेख डॉ. कलाम के जीवन, योगदान और उनकी अमर विरासत का विनम्र श्रद्धांजलि है। उनके आदर्श और विचार आने वाली पीढ़ियों को हमेशा रास्ता दिखाते रहेंगे।