देहरादून: ईरान में इस्लामिक स्टडीज के लिए पढ़ाई करने गए उत्तर प्रदेश के मंगलौर इलाके के 30 छात्र इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद बंद हुए हवाई क्षेत्र में फंस गए हैं। शनिवार दोपहर को हुए हमलों के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे छात्रों की वापसी मुश्किल हो गई है। परिजनों की नींद उड़ गई है और वे भारत सरकार से बच्चों को सकुशल वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। मंगलौर से हर साल दर्जनों लोग धार्मिक यात्रा और इस्लामिक शिक्षा के लिए ईरान जाते हैं, लेकिन इस बार युद्ध जैसे हालात ने सबको दहशत में डाल दिया है। फोन पर भी संपर्क टूट गया है, जिससे परिवारवालों का बुरा हाल है।
मौलाना सिब्ते हसन ने बताया कि मंगलौर से 10, जैनपुर झंझेडी से 10 और टांडा भनेड़ा से 2 छात्र ईरान में इस्लामिक स्टडीज कर रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य छात्र भी वहां मौजूद हैं, जिनमें कुछ के परिजन भी साथ हैं। खलील अहमद ने कहा, स्कूलों को निशाना बनाना बेहद निंदनीय है। हमारे बच्चे किस हाल में हैं, कोई खबर नहीं मिल रही। चिंता की स्थिति बेहद गंभीर है। ग्राम पंचायत अंबाड़ी के निवासी ईरान में अपनी पत्नी के साथ फंसे हुए हैं। दोनों कुम शहर के एक प्रमुख इस्लामिक विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं। सबसे चिंताजनक मामला है 24 वर्षीय अली हैदर और उनकी 23 वर्षीय पत्नी नूरजहां का। यह युवा जोड़ा पिछले चार साल से ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 90 किलोमीटर दूर कुम शहर में रहकर इस्लामिक शिक्षा ग्रहण कर रहा है। उनका निकाह पिछले साल अक्टूबर में हुआ था।
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पिता शेर अली ने दर्द भरी आवाज में बताया, “मंगलवार को बेटे-बहु से फोन पर बात हुई थी। उसके बाद से कोई संपर्क नहीं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद परेशान हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल भी युद्ध जैसे हालात में अली हैदर भारतीय दूतावास की मदद से सुरक्षित भारत लौटा था। अब भी दूतावास के संपर्क में होने की जानकारी है, लेकिन पुख्ता अपडेट का इंतजार है।मंगलौर इलाका धार्मिक रूप से सक्रिय है। यहां से हर साल सैकड़ों युवा ईरान के कुम और मशहद जैसे शहरों में जाकर उलेमा बनने की ट्रेनिंग लेने जाते हैं। ईरान शिया इस्लाम का केंद्र होने के कारण यहां की शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है। लेकिन मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से यह यात्रा जोखिम भरी हो गई है।
शनिवार को इजरायल और अमेरिका के हमलों ने हालात और बिगाड़ दिए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे हवाई सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं। छात्रों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, और लंबे समय तक रहना मुश्किल हो रहा है।परिजन स्थानीय नेताओं और सांसदों से संपर्क कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि भारत सरकार तत्काल विशेष विमान या डिप्लोमेटिक चैनलों से छात्रों को निकाले। विदेश मंत्रालय से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पिछले अनुभवों के आधार पर उम्मीद बंधी है। एक परिजन ने कहा, “हमारे बच्चे देश का भविष्य हैं। सरकार को इन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।
स्थानीय मुस्लिम संगठन भी जुटे हैं और दूतावास से लगातार बातचीत कर रहे हैं।यह घटना मध्य पूर्व की अस्थिरता को उजागर करती है। भारत जैसे देश के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। ईरान में हजारों भारतीय छात्र पढ़ते हैं, जिनकी सुरक्षा अब केंद्र में है। उम्मीद है कि जल्द ही अच्छी खबर आएगी और ये युवा सकुशल घर लौटेंगे। फिलहाल, मंगलौर के घरों में चिंता का माहौल है। परिवार प्रार्थना में लीन हैं, प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके अपनों की खैरियत हो।
