पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक ऐसी घटना ने सभी को सन्न कर दिया है, जहां मात्र 12 साल की उम्र में छठी कक्षा का छात्र कृष ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। बचपन से ही पढ़ाई के लिए अपनी बुआ के पास रहने वाला यह मासूम बच्चा तीन दिन पहले ही अपने गांव से लौटा था, लेकिन शुक्रवार को घर में अकेला रहते हुए उसने ऐसा कदम उठा लिया, जिसकी कल्पना भी परिजन नहीं कर पाए। कृष का शव घर के कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, करीब 10 बजे कृष की बुआ अपने दोनों बच्चों को लेकर बाहर गई थीं। घर में अकेला रह गया कृष उस समय शायद किसी गहरे मानसिक दबाव से जूझ रहा था। शाम को जब बुआ घर लौटीं, तो दरवाजा काफी देर तक न खुलने पर शक हुआ। जालीदार दरवाजे की कुंडी तोड़कर अंदर घुसीं तो भयावह दृश्य सामने आ गया। कृष पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ था।
पंखे तक पहुंचने के लिए उसने कमरे में रखी टेबल पर कुर्सी चढ़ाई थी, जो बाद में गिर चुकी थी। यह नजारा देखकर परिजन स्तब्ध रह गए। परिजनों ने तुरंत बच्चे को नीचे उतारा और नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक कृष की सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल ललित मोहन जोशी ने बताया, शव को पोस्टमॉर्टम हाउस में रखवा दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन छात्र ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका अभी कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। हम मामले की गहन जांच कर रहे हैं और हर पहलू से पड़ताल की जा रही है। परिवार से पूछताछ जारी है। कृष का परिवार सामान्य पृष्ठभूमि का बताया जा रहा है।
यह भी पढ़े: लिफ्ट के बहाने दुष्कर्म: रुद्रपुर में युवती से गैंगरेप, पुलिस ने 1 को दबोचा – दूसरा फरार!
बचपन से ही वह पढ़ाई के लिए बुआ के पास रहता था, जो शहर में स्कूल चलाती हैं। तीन दिन पहले गांव से लौटने के बाद वह सामान्य लग रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर कोई बात उसे खाए जा रही थी। पड़ोसियों के अनुसार, कृष होमवर्क और परीक्षा को लेकर चिंतित रहता था। क्या पढ़ाई का दबाव था? क्या स्कूल में कोई उत्पीड़न? या पारिवारिक कलह? ये सवाल आज पूरे समाज के सामने हैं।यह घटना उत्तराखंड में बढ़ते बाल आत्महत्याओं के सिलसिले का हिस्सा बन गई है। पिछले एक साल में राज्य में 10 से अधिक ऐसे मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें ज्यादातर 10-14 साल के बच्चे शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद ऑनलाइन पढ़ाई, अभिभावकों की अपेक्षाएं और सोशल मीडिया का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. अनुराग जोशी कहते हैं, “बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन, अकेले रहना या पढ़ाई से घबराहट को नजरअंदाज न करें। समय पर काउंसलिंग जरूरी है।
पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे काउंसलर नियुक्त करें और अभिभावक-शिक्षक बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा करें।” साथ ही, हेल्पलाइन नंबर 104 और 181 को सक्रिय रखने के आदेश दिए गए हैं।यह दुखद हादसा समाज को आईना दिखाता है। मासूम कृष की मौत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों से खुलकर बात करें, उनकी भावनाओं को समझें। स्कूलों में भी मानसिक स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा। वरना ऐसे और मासूम खोते रहेंगे। कृष को श्रद्धांजलि, भगवान उसकी आत्मा को शांति दें।
