हर वर्ष 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है। यह दिन उन अनगिनत जिंदगियों को बचाने और बदलने की पहल का प्रतीक है जो अंग प्रत्यारोपण के जरिए संभव होती हैं। अंगदान सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के सर्वोच्च मूल्यों में से एक है – किसी अनजान व्यक्ति को नया जीवन देने का संकल्प।
2025 में इस दिवस का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति, बढ़ती जागरूकता और सरकार व गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों के बावजूद, अंगदान के प्रति भ्रांतियां और झिझक आज भी समाज में मौजूद हैं। इस लेख में हम अंगदान की आवश्यकता, प्रक्रिया, कानूनी पहलू, चुनौतियां और सफल कहानियों के जरिए इस विषय की गहराई को समझेंगे।
अंगदान क्या है?
अंगदान (Organ Donation) का अर्थ है अपने शरीर के अंग या ऊतक (Tissues) किसी जरूरतमंद मरीज को दान करना, ताकि उसके जीवन को बचाया जा सके या उसकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सके। यह दो तरह से किया जा सकता है:
- जीवित दान (Living Donation) – इसमें जीवित व्यक्ति अपने कुछ अंग जैसे किडनी, लिवर का एक हिस्सा, अस्थि मज्जा या रक्त दान कर सकता है।
- मृत्यु उपरांत दान (Deceased Donation) – मृत्यु के बाद व्यक्ति के कार्यशील अंग जैसे हृदय, फेफड़े, यकृत, गुर्दा, कॉर्निया, अग्न्याशय और त्वचा दान की जा सकती है।
अंगदान का महत्व
- जीवन रक्षक – एक व्यक्ति अपने अंगदान से 8 से 9 लोगों की जान बचा सकता है।
- जीवन गुणवत्ता में सुधार – प्रत्यारोपित अंग न केवल मृत्यु से बचाते हैं बल्कि मरीज को सामान्य जीवन जीने में मदद करते हैं।
- अंगों की कमी की समस्या – भारत सहित विश्वभर में अंगों की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है। लाखों मरीज हर साल अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में रहते हैं।
- मानवीय मूल्य – निःस्वार्थ सेवा मानवीय मूल्यों का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यह दूसरों के जीवन में एक नई उम्मीद और रोशनी ला सकती है।
2025 में अंगदान की स्थिति
स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में करीब 5 लाख से अधिक लोग प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं, लेकिन उपलब्ध अंगों की संख्या इस आवश्यकता का केवल 5-10% ही है।
- किडनी प्रत्यारोपण की मांग सबसे अधिक है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और मिथक अंगदान में सबसे बड़ी बाधा हैं।
- सरकार ने National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) के तहत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और त्वरित प्रक्रिया की सुविधा बढ़ाई है।
कानूनी पहलू
भारत में अंगदान “मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994” (Transplantation of Human Organs and Tissues Act, THOTA) के तहत नियंत्रित होता है।
- जीवित दाता केवल निकट संबंधी (पति/पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे, दादा-दादी) हो सकते हैं।
- मृत्यु उपरांत अंगदान के लिए परिजन की अनुमति आवश्यक है।
- ब्रेन डेथ (Brain Death) को कानूनी मान्यता है और इसके बाद अंगदान संभव है।
अंगदान की प्रक्रिया
- रजिस्ट्रेशन – व्यक्ति ऑनलाइन या अस्पताल में रजिस्टर कर सकता है।
- अंगदान कार्ड – पंजीकरण के बाद दाता को Organ Donor Card मिलता है।
- परिवार की सहमति – मृत्यु के बाद अंगदान के लिए परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण है।
- चिकित्सा परीक्षण – अंगों की उपयुक्तता और स्वास्थ्य की जांच की जाती है।
- प्रत्यारोपण – जरूरतमंद मरीज को सर्जिकल प्रक्रिया द्वारा अंग प्रत्यारोपित किया जाता है।
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अंगदान से जुड़े मिथक और सच्चाई
- मिथक: अंगदान से शरीर विकृत हो जाता है।
सच्चाई: अंगदान के बाद भी शरीर को सामान्य रूप से अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया जा सकता है। - मिथक: अंगदान से दाता की जान को खतरा होता है।
सच्चाई: जीवित दान में केवल ऐसे अंग/भाग दान किए जाते हैं जो दाता के जीवन पर असर नहीं डालते। - मिथक: अंगदान केवल अमीर लोगों के लिए होता है।
सच्चाई: अंग वितरण सरकार और अधिकृत संस्थाओं द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया से किया जाता है।
सफल कहानियां जो प्रेरणा देती हैं
- दिल्ली की 23 वर्षीय युवती – ब्रेन डेथ के बाद उसके परिजनों ने हृदय, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए, जिससे 5 लोगों की जिंदगी बची।
- चेन्नई का किसान – किडनी दान कर अपने दोस्त की जिंदगी बचाई और समाज को संदेश दिया कि दान धन से नहीं, दिल से होता है।
जागरूकता बढ़ाने के प्रयास
- सरकारी अभियान – NOTTO और राज्यस्तरीय अंगदान संगठन जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं।
- एनजीओ और सोशल मीडिया – ऑनलाइन कैंपेन, वेबिनार और अंगदान शिविर का आयोजन।
- स्कूल और कॉलेज स्तर पर शिक्षा – युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यशालाएं।
2025 की थीम
विश्व अंगदान दिवस 2025 की थीम है – “Donate Organs, Gift Life – अंगदान करें, जीवन उपहार दें“। यह संदेश देता है कि हम सभी के पास किसी के लिए चमत्कार करने की क्षमता है।