सुरेश उपाध्याय। पैसा कमाना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन अगर किसी में पैसे की हवस पैदा हो जाए और वह लोगों की जिंदगी, समाज और पर्यावरण पर भारी पड़ने लगे तो हालात खतरनाक हो जाते हैं। पिछले कुछ सालों में इस देश के नेताओं, अफसरों और पूंजीपतियों के गठजोड़ ने देश में ऐसे ही खतरनाक हालात पैदा कर दिए हैं। ये पैसे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं, भले ही इसकी भारी कीमत आम जनता को क्यों न चुकानी पड़े। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश ने 2013 की केदारनाथ आपदा से कोई सबक…
Author: Hemant Upadhyay
देवभूमि उत्तराखंड को रत्नगर्भा भी कहा गया है। यहां सदियों से ऐसे सन्त और महापुरुष जन्मे जिन्होंने सदैव मनसा, वाचा और कर्मणा से देश व समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया और राष्ट्र को नई दिशा दी। इन्हीं महान विभूतियों में से एक महान विभूति थे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के महानायक इन्द्रमणि बडोनी , जिन्हें “पर्वतीय गांधी” कहा गया। उन्होंने पृथक राज्य उत्तराखंड की स्थापना के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। शासन के जुल्मों के बावजूद वह अहिंसक संघर्ष करते रहे और अलग पर्वतीय राज्य की आवाज़ को बुलंद करते रहे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को जन–जन तक…
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025: विश्व में भारत की ऋषि परंपरा की गूंज 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, संपूर्ण विश्व भारत की ऋषि परंपरा का अनुसरण कर, योग की शक्ति को महसूस करेगा। योग हमारे ऋषि मुनियों की सम्पूर्ण विश्व को एक ऐसी देन है, जिसने वैश्विक पटल पर भारत को हमेशा से ही शीर्ष पर विराजमान किया है। योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः योग का अर्थ है “चित्त की अशांत वृत्तियों को शांत करना। जब चित्त शांत होता है, तो हम आत्मा का अनुभव कर सकते हैं।” योग दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? योग के अनगिनत लाभ हैं…
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2025: बाल श्रम केवल एक कानूनी या सामाजिक मुद्दा नहीं है, यह एक ऐसा गंभीर विषय है जिनमे भारत का भविष्य छुपा है बच्चे हमारे देश की नींव है और बाल श्रम इस नींव का विध्वंश कर रहा है। एक बच्चे को किताबों से दूर करके हम सिर्फ उसका वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य भी छीन लेते हैं। हर वर्ष 12 जून को दुनिया भर में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य समाज और सरकारों का ध्यान उस कड़वी सच्चाई की ओर आकर्षित…
उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि ही नहीं बल्कि वीरों की भी भूमि रही है इस भूमि पर अनेक ऐसे वीर पैदा हुए हैं जिन्होंने इस धरा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आजादी के पहले से लेकर आज तक यह भूमि अनेक वीरों को जन्म देती आई है और उन वीरों के शौर्य की गाथाएँ आज भी सम्पूर्ण देश मे बताई जाती है ऐसे ही एक देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं “वीर केसरी चंद”। वीर केसरी चंद्र उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र ‘वर्तमान समय के देहरादून’ ज़िले के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने आज़ाद हिंद फौज में शामिल होकर देश…
परीक्षा से पहले आप को क्या करना चाहिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है परीक्षा से पहले परीक्षार्थी की मनोस्थिति ऐसी होती है जैसे चक्रव्यूह मे फसे योद्धा की। उसे अपनी तैयारी की ऊपर भी संदेह होने लगता है,चाहे उसकी तैयारी अपने विषय मे पूर्ण हो। उसे लगता है कि उसने उतना नहीं पढ़ा जितना परीक्षा मे आ सकता है।यह संदेह की स्थिति उसके मन मे उत्पन्न होती रहती है और जैसे ही परीक्षा का समय आता है वह घबराहट मे पढ़ी हुई चीजें भी भूलने लगता है। परीक्षा के कुछ दिन पहले आप इन उपायों को कर के तैयारी…
उत्तराखंड मे भू क़ानून बनाने के लिए लोगों द्वारा अत्यधिक संघर्ष चल रहा है जो अभी कुछ वर्षों से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। उत्तराखंड में भू-कानून एक महत्वपूर्ण विषय है, यह कानून प्रदेश में भूमि की खरीद-फरोख्त, बाहरी निवेश और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों से जुड़ा हुआ है। ज्यादातर लोग इसे राज्य के विकास के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ नासमझ इसे स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ समझते हैं। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना बाहरी निवेश और अनियंत्रित भूमि खरीद से प्रभावित हो…
जयशंकर प्रसाद परिचय: हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न हिंदी साहित्य के इतिहास में जयशंकर प्रसाद का नाम एक ऐसे अनमोल रत्न के रूप में विद्यमान है, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और दर्शन को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। प्रसाद जी हिंदी साहित्य के आधुनिक काल मे छायावाद युग के प्रवर्तक और प्रमुख स्तंभ थे। उनकी रचनाओं ने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। उनका जीवन और साहित्यिक योगदान आज भी पाठकों और विद्वानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि जयशंकर प्रसाद का जन्म 30…
Republic Day 2025: इतिहास, महत्व और उत्सव Republic Day 2025 भारत का 76 वां गणतंत्र दिवस है, जिसे 26 जनवरी को पूरे देश में गर्व और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह दिन हमारे संविधान को अपनाने और भारत के गणराज्य बनने की याद दिलाता है। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ और भारत ने खुद को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। गणतंत्र दिवस का जश्न न केवल हमारे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सम्मानित करने का दिन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और नागरिकों की भागीदारी का प्रतीक भी…
पश्चिमी संस्कृति का हमारे समाज पर व्यापक प्रभाव वर्तमान युग में, जब दुनिया तेजी से एक “वैश्विक ग्राम ” (ग्लोबल विलेज) के रूप मे परिवर्तित हो रही है तब पश्चिमी संस्कृति ने हमारे जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है। यह प्रभाव हमारे रहन-सहन, सोचने के तरीके, मूल्यों और सामाजिक संरचनाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आज, भारत जैसे प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर वाले देश में भी पश्चिमी जीवनशैली का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। हम यह देखते हैं कि युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक जड़ों से अलग हो रही है और आधुनिकता की ओर आकर्षित…